
मुंबई/सेवाग्राम : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती, दशहरा और धम्मचक्र परिवर्तन दिवस – ऐसा स्वर्णयोग नियति का संकेत है। उस संकेत को मानकर हमने यह आह्वान किया था कि संघ संविधान और गांधी विचारों को स्वीकार करे तथा संघ का विसर्जन करे। लेकिन आज दशहरे के दिन सरसंघचालक मोहन भागवत ने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा। संघ को 100 वर्ष हो गए लेकिन “मुँह में राम, बगल में छुरी” – यह संघ की भूमिका आज भी बदली नहीं है, ऐसा हल्लाबोल महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की प्रमुख उपस्थिति में दीक्षाभूमि से शुरू हुई संविधान सत्याग्रह पदयात्रा का सेवाग्राम में सफल समापन हुआ। इस अवसर पर पूर्व न्यायमूर्ति बी. जी. कोलसे पाटील, शहीद भगतसिंह के भतीजे प्रो. जगमोहन, पूर्व मंत्री सुनील केदार, रणजीत कांबले, राजेंद्र मुलक, अनिस अहमद, सांसद डॉ. कल्याण काले, सांसद गोवाल पाडवी, चारुलता टोकस, प्रदेश महासचिव संदेश सिंगलकर, वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे, वर्धा जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज चांदूरकर, युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भान, प्रदेशाध्यक्ष शिवराज मोरे आदि उपस्थित थे।
इस अवसर पर बोलते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आगे कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का काम समाज में भ्रम फैलाने का है। देश का बँटवारा महात्मा गांधी की वजह से हुआ और पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये दिए, ऐसा अपप्रचार संघ और संघ परिवार करता आया है। इसी तरह महान क्रांतिकारी भगतसिंह को फाँसी हुई तब गांधीजी चुप बैठे थे – यह भी एक अपप्रचार है। लेकिन 30 जनवरी 1948 को गांधीजी की हत्या से पहले उन्हें मारने के छह प्रयास हुए थे, तब पाकिस्तान और 55 करोड़ का प्रश्न कहाँ था? भगतसिंह को फाँसी न हो इसके लिए गांधीजी ने अनेक प्रयास किए, यह स्वयं भगतसिंह के भतीजे प्रो. जगमोहन ने कहा है।
संघ को 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं, हाल ही में नागपुर के वरायटी चौक पर संघ ने महात्मा गांधी को अभिवादन किया। जिनका सबसे अधिक समय महात्मा गांधी को बदनाम करने में गया, उन्हें अंततः गांधीजी को ही शरण जाना पड़ा – यह संघ की वैचारिक पराजय है। उन्होंने अब संविधान स्वीकार करना चाहिए और संविधान की भावना के अनुरूप देश निर्माण में काम करना चाहिए। गांधी विचार स्वीकार करना चाहिए – यह हमारा आह्वान था। लेकिन आज जब युवक कांग्रेस पदाधिकारी संविधान की प्रति लेकर संघ मुख्यालय रेशीमबाग की ओर जा रहे थे, तब उन्हें गिरफ्तार किया गया। आज भले ही गिरफ्तारी हुई है, लेकिन हम फिर से एनएसयूआई के हाथों संविधान देकर भेजेंगे। और यदि तब भी नहीं लिया गया तो 30 जनवरी गांधी पुण्यतिथि पर महिला पदाधिकारी जाएँगी, और तब भी नहीं लिया तो 14 अप्रैल को फिर उन्हें संविधान देने का प्रयास करेंगे। आरएसएस विसर्जन की माँग लेकर हम पूरे वर्ष पदयात्रा निकालेंगे – ऐसा संकल्प कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने व्यक्त किया।
विधिमंडल दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि यह देश सबका है – शोषित, पीड़ित, पिछड़े समाज का भी है। और सबको साथ लेकर चलने वाला संविधान है, इसलिए संविधान की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। पिछले 11 वर्षों में देश को अस्थिर किया गया है। केवल जाति और धर्म के नाम पर नफरत फैलाकर अपनी कुर्सी बचाने का काम चल रहा है। किसानों की समस्याएँ, बेरोजगारों की समस्याएँ सरकार सुनती ही नहीं। देश पर कर्ज का पहाड़ खड़ा कर दिया है। जिन्होंने संघ पर प्रतिबंध लगाया, उन्हीं सरदार पटेल की सबसे बड़ी प्रतिमा भाजपा सरकार ने खड़ी की। उनके पास कोई भी महापुरुष नहीं है। संविधान का विरोध करने वाले, तिरंगा न फहराने वाले संघ और भाजपाई देशभक्ति सिखा रहे हैं – ऐसा तंज वडेट्टीवार ने कसा।
आज संविधान सत्याग्रह पदयात्रा शुरू करने से पहले स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता जी. जी. पारीख को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एक प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी। पारीख ने देश की स्वतंत्रता के लिए और समाज में न्याय, समानता के लिए कार्य किया। उनके निधन से स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ताओं में से एक अनमोल व्यक्तित्व खो गया है। उनका आदर्श और कार्य की याद हमेशा प्रेरणादायी रहेगी – ऐसी भावना प्रदेशाध्यक्ष ने व्यक्त की।





























































































































































































