India is currently in the midst of a grave crisis; it is the Congress, not the Modi government, that can lead the country out of it—'Modi must go': Yashwant Sinha
India is currently in the midst of a grave crisis; it is the Congress, not the Modi government, that can lead the country out of it—'Modi must go': Yashwant Sinha

मुंबई: देश में अटल बिहारी वाजपेयी Atal bihari vajpayee की सरकार के समय भी विपक्ष का सम्मान किया जाता था। संसद में कभी विपक्ष को दुश्मन नहीं माना गयालेकिन आज विपक्ष को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। राजनीतिक प्रतिशोध का दौर चल रहा है और इससे देश के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस संकट का मुकाबला केवल कांग्रेस ही कर सकती है। कांग्रेस पर बड़ी जिम्मेदारी है और कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर संघर्ष करने का जो निर्णय लिया हैवह सही है क्योंकि वर्तमान संकट से मोदी सरकार देश को बाहर नहीं निकाल सकती। इसलिए ‘मोदी मस्ट गो’ऐसा स्पष्ट संदेश पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा yashwant sinha ने दिया।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अर्थशास्त्र विभाग तथा ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस द्वारा संयुक्त रूप से ‘भारत में आने वाली आर्थिक सुनामी?’ विषय पर एक परिसंवाद आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हावरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमारपूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाणपूर्व सांसद एवं योजना आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. भालचंद्र मुंगेकरपूर्व सांसद कुमार केतकर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की।

इस अवसर पर यशवंत सिन्हा ने कहा कि मोदी सरकार जिस विकास दर का दावा कर रही हैउसके आंकड़े ही गलत हैं। सरकार कह रही है कि भारत की विकास दर 7.7 प्रतिशत हैलेकिन वास्तविकता अलग है। अनेक अर्थशास्त्रियों ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी भारत के आंकड़ों पर संदेह जताते हुए भारत को ‘सी’ ग्रेड में रखा है और कहा है कि भारत के आंकड़े पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हैं। जबकि ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका को ‘ए’ ग्रेड मिला है। निवेश बढ़ेगा तभी विकास दर बढ़ेगीलेकिन पिछले 12 वर्षों में निवेश GDP के लगभग 32 प्रतिशत के आसपास ही रहा है। ऐसे में विकास दर 6 से 6.5 प्रतिशत ही हो सकती है। सरकार के आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की बात करते हैंलेकिन इसके लिए 8 प्रतिशत से अधिक विकास दर आवश्यक है और वर्तमान परिस्थितियों में यह लक्ष्य प्राप्त करना बेहद कठिन दिखाई देता है।

 उन्होंने कहा कि भारत के सामने खड़ा संकट केवल ईरान युद्ध के कारण नहीं है। सरकार डीजल का राशनिंग कर रही हैरुपया लगातार कमजोर हो रहा हैमहंगाई बढ़ रही है और शेयर बाजार की स्थिति भी चिंताजनक है। पिछले दो वर्षों में 3.25 लाख करोड़ रुपये देश से बाहर चले गए हैं। किसान संकट में हैउर्वरकों की कमी है और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इसका व्यापक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

 यशवंत सिन्हा ने आगे कहा कि भारत ने अतीत में अनेक संकटों का सफलतापूर्वक सामना किया है। पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक सभी सरकारों ने चुनौतियों का मुकाबला कियालेकिन वर्तमान मोदी सरकार में संकटों से लड़ने की इच्छाशक्ति नहीं है। झूठ बोलकर काम चलाया जा रहा है। आज भारत सरकार अमेरिका के सामने झुकी हुई दिखाई देती है। प्रधानमंत्री अमेरिका के सामने नतमस्तक हैं और इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। अमेरिका ईरान-पाकिस्तान विवाद में मध्यस्थता कर रहा हैतो फिर हमारे तथाकथित ‘विश्वगुरु’ कहाँ हैंयह सवाल भी उन्होंने उठाया।

 वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार ने कहा कि मोदी सरकार GDP के वास्तविक आंकड़े छिपा रही है। देश का असंगठित क्षेत्र बहुत बड़ा है और छोटे तथा सीमांत किसानों की संख्या भी अधिक है। नोटबंदी का सबसे बड़ा नुकसान MSME क्षेत्र को हुआ। जीएसटी को गलत तरीके से लागू किया गयाजिससे असंगठित क्षेत्र प्रभावित हुआ जबकि संगठित क्षेत्र को लाभ मिला। असंगठित क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे श्रमिक हैं जिनकी मासिक आय 10 हजार रुपये से भी कम है। बढ़ती महंगाई के बीच वे अपना जीवन कैसे चलाएँगे?

 उन्होंने कहा कि महंगाई का प्रभाव संगठित और असंगठित क्षेत्रों पर अलग-अलग पड़ता है। गरीबों की वास्तविक स्थिति के आंकड़े सामने नहीं लाए जा रहे हैं। गरीब व्यक्ति लगातार दबाव में है। देश का बाजार कमजोर हो रहा हैतकनीकी क्षेत्र में भारत पीछे है और अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर हमारा निवेश अमेरिका और चीन की तुलना में बहुत कम है। आयात बढ़ रही है और भारत अमेरिकी दबाव के सामने झुकता दिखाई दे रहा है। शिक्षा पर भी भारत का खर्च अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। संगठित और असंगठित क्षेत्रों के बीच की खाई बढ़ रही है। रोजगार के अवसर घट रहे हैंशिक्षित युवाओं को नौकरियाँ नहीं मिल रही हैंजिससे सामाजिक समस्याएँ बढ़ रही हैं। सरकार वास्तविक आंकड़े छिपाकर लोगों को भ्रमित कर रही है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने का दावा भी वास्तविकता से दूर है। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों के हाथ में पैसा नहीं होगातब तक मांग नहीं बढ़ेगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि आज देश कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में सिमट गया है और जनता के गले पर फंदा कसता जा रहा है। सवाल यह है कि संघर्ष की भावना कहाँ चली गईवर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए सड़क पर उतरकर स्वतंत्रता की दूसरी लड़ाई लड़नी होगी। यदि कहीं गलत हो रहा है तो उसके खिलाफ आवाज उठानी होगी।

 उन्होंने कहा कि पूरे मई महीने में उन्होंने राज्यभर में विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर आंदोलन किए। इस दौरान कई गंभीर बातें सामने आईं। 500 रुपये के नोटों की कमी दिखाई दे रही हैबैंकों में पर्याप्त नकदी नहीं है। परीक्षाएँ हैं लेकिन पेपर लीक हो रहे हैंडिग्रियाँ हैं लेकिन रोजगार नहीं है। युवाओं का शिक्षा से मोहभंग हो रहा है। खरीफ सीजन शुरू हो चुका है लेकिन किसान नाराज हैं। कृषि उत्पादों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और असंतोष बढ़ रहा है। स्थिति गंभीर है और इससे निकलने का रास्ता खोजना होगा। उन्होंने कहा कि जाति और धर्म को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय आर्थिक मुद्दों पर राजनीति होनी चाहिए।

कार्यक्रम का प्रारंभिक वक्तव्य अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख विश्वास उटगी ने दिया। अतिथियों का परिचय पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कराया। आभार प्रदर्शन डॉ. भालचंद्र मुंगेकर ने किया जबकि कार्यक्रम का संचालन गजानन देसाई ने किया।

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