The district council and panchayat committee elections should be conducted using ballot papers instead of EVMs
The district council and panchayat committee elections should be conducted using ballot papers instead of EVMs

मुंबई: राज्य में हाल ही में हुए 29 महानगरपालिका चुनावों ने चुनाव व्यवस्था की असलियत को पूरी तरह उजागर कर दिया है। शहरी क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत का अत्यंत कम होना केवल मतदाताओं की उदासीनता नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया पर जनता के घटते विश्वास का स्पष्ट संकेत है। देश के कई राज्यों ने जनता का विश्वास बनाए रखने और विवादों से बचने के लिए स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव EVM के बजाय बैलेट पेपर पर कराने का निर्णय लिया है। फिर महाराष्ट्र में ही EVM पर इतना आग्रह क्यों? और यह आग्रह किसके लाभ के लिए है? ऐसे सवाल मतदाता पूछ रहे हैं। इस जनभावना का सम्मान करते हुए जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव बैलेट पेपर पर कराए जाएँ—यह मांग कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विधायक नाना पटोले Nana Patole ने की है।

राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे गए पत्र में नाना पटोले ने आगे कहा है कि मतदाता सूची में भारी गड़बड़ियाँ, मतदान केंद्र खोजने के लिए मतदाताओं को दो–तीन घंटे तक भटकना पड़ना, तथा हजारों मतदाताओं का बिना मतदान किए लौट जाना—ये सभी बातें निर्वाचन आयोग की अक्षमता के गंभीर संकेत हैं। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए घातक है। अत्यंत गंभीर बात यह है कि नगरपालिका चुनावों में VVPAT प्रणाली का उपयोग नहीं किया गया, जिससे मतदाता को अपने मतदान की पुष्टि करने के अधिकार से वंचित किया गया। इसके अलावा, मतदाताओं की उंगली पर लगाई गई स्याही हाथ धोने के बाद मिटती हुई पाई गई। इन सभी घटनाओं के कारण चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव लोकतंत्र की रीढ़ हैं। यदि इन चुनावों को लेकर संदेह, अविश्वास और कुप्रबंधन का माहौल बना रहा, तो इसका लोकतंत्र के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए जनभावना को ध्यान में रखते हुए ये चुनाव EVM के बजाय बैलेट पेपर पर कराए जाएँ—ऐसी मांग नाना पटोले ने अपने पत्र में की है।

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