Posting photos of trains on social media could prove costly; here is how cybercriminals can misuse such images
Posting photos of trains on social media could prove costly; here is how cybercriminals can misuse such images

नई दिल्ली: आजकल ट्रेन में सफर के दौरान फोटो और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करना आम बात हो गई है। यात्री चलती ट्रेन, रेलवे स्टेशन, कोच, सीट और खिड़की से बाहर के दृश्य की तस्वीरें खींचकर फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हैं। लेकिन यही तस्वीरें कभी-कभी साइबर अपराधियों के लिए उपयोगी जानकारी का जरिया बन सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से साझा की गई तस्वीरों से किसी व्यक्ति की पहचान, यात्रा से जुड़ी जानकारी और लोकेशन जैसी जानकारियां हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। AI और फोटो एडिटिंग तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ का खतरा भी बढ़ गया है।

ट्रेन की फोटो से कैसे हो सकता है नुकसान?

किसी तस्वीर में दिखाई दे रहा ट्रेन नंबर, कोच नंबर, सीट नंबर, स्टेशन का नाम, टिकट, पीएनआर या यात्रा की तारीख साइबर अपराधियों को अतिरिक्त जानकारी दे सकता है। यदि यात्री ने फोटो के साथ अपनी यात्रा की पूरी जानकारी भी पोस्ट कर दी, तो जोखिम और बढ़ सकता है।

साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर उपलब्ध अलग-अलग जानकारियों को जोड़कर किसी व्यक्ति की प्रोफाइल तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं।

टिकट और पीएनआर की फोटो शेयर करने से बचें

यात्रियों को अपनी ट्रेन टिकट, पीएनआर, मोबाइल नंबर, क्यूआर कोड और अन्य व्यक्तिगत जानकारी वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए।

भारतीय रेलवे की डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था में ऑनलाइन बुकिंग का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। रेलवे ने भी ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली में संदिग्ध गतिविधियों और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।

AI से फोटो में हो सकता है बदलाव

आज के दौर में किसी व्यक्ति की सार्वजनिक तस्वीर का गलत इस्तेमाल कर फर्जी फोटो, नकली वीडियो या डीपफेक कंटेंट बनाने की कोशिश की जा सकती है। हाल ही में AI का इस्तेमाल कर फर्जी तस्वीरें और वीडियो तैयार करने के मामलों में साइबर अपराध जांच भी सामने आई है।

इसलिए सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें साझा करते समय सावधानी बरतना जरूरी है।

चलती ट्रेन में वीडियो बनाना भी खतरनाक

सिर्फ साइबर अपराध ही नहीं, चलती ट्रेन में वीडियो या रील बनाने के दौरान सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है। रेलवे और मेट्रो प्रशासन ने चलती ट्रेन के दरवाजे या खिड़की के पास खतरनाक तरीके से वीडियो बनाने को लेकर समय-समय पर चेतावनी दी है। हाल में दिल्ली मेट्रो ने चलती ट्रेन की खिड़की पर मोबाइल चिपकाकर वीडियो बनाने वाले ट्रेंड को लेकर भी चेतावनी जारी की थी।

यात्रियों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

– टिकट और पीएनआर की पूरी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट न करें।
– सीट नंबर और कोच की जानकारी सार्वजनिक करने से बचें।
– मोबाइल नंबर और अन्य निजी जानकारी वाली तस्वीरें साझा न करें।
– यात्रा की पूरी जानकारी सार्वजनिक पोस्ट में न दें।
– सोशल मीडिया अकाउंट की गोपनीयता सेटिंग जांचते रहें।
– अनजान व्यक्ति को यात्रा से जुड़ी निजी जानकारी न दें।
– संदिग्ध लिंक या संदेश पर क्लिक न करें।
– अपनी तस्वीरों के गलत इस्तेमाल की आशंका होने पर स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें।
– साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत करें।

एक छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

ट्रेन यात्रा की यादों को फोटो और वीडियो के रूप में सोशल मीडिया पर साझा करना सामान्य बात है, लेकिन पोस्ट करने से पहले यह देखना जरूरी है कि तस्वीर में कहीं टिकट, पीएनआर, मोबाइल नंबर, सीट नंबर या अन्य निजी जानकारी तो दिखाई नहीं दे रही है। कुछ सेकंड की सावधानी साइबर अपराध के बड़े जोखिम से बचा सकती है।

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