
मुंबई:कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के संदर्भ में ‘गूंगी गुड़िया’ शब्द कोई अपशब्द, गाली या असंसदीय शब्द नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी एक समय ‘गूंगी गुड़िया’ कहा गया था, लेकिन उन्होंने अपने कार्य और दृढ़ नेतृत्व से स्वयं को सिद्ध किया, जिसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें ‘दुर्गा’ की उपाधि दी। सुनेत्रा पवार को भी अपने कार्यों से यह साबित करना चाहिए कि वे ‘दुर्गा’ हैं। यह बात महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कही।
गांधी भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वालों को सवालों के जवाब देने पड़ते हैं। बीड में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के बगल में बैठे एक गुंडा प्रवृत्ति के जनप्रतिनिधि ने प्रश्न पूछने वाले पत्रकार को चुप कराया, लेकिन उपमुख्यमंत्री ने एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने पत्रकारों के सवालों का भी जवाब नहीं दिया। इसलिए ‘हाथ पर हाथ रखकर और मुंह पर उंगली रखकर बैठने’ के संदर्भ में ‘गूंगी गुड़िया’ शब्द का प्रयोग किया गया। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर बोलती नहीं हैं। अजित पवार का विमान दुर्घटना में दुखद निधन हुआ, लेकिन उसकी जांच पर वे कुछ नहीं बोलतीं। अब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई, उस पर भी वे मौन हैं। उनसे वित्त विभाग वापस ले लिया गया, उस पर भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। भाजपा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं के अधिकारों को सीमित कर रही है, इस पर भी वे कुछ नहीं कहतीं। इस प्रकार लगातार मौन रहना सार्वजनिक जीवन और उपमुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। अजित पवार एक स्पष्टवादी और मजबूत नेतृत्व वाले नेता थे, लेकिन उनके दल का नेतृत्व करने वाली व्यक्ति किसी भी मुद्दे पर बोलती नहीं है, इसलिए यह टिप्पणी की गई है। यह आलोचना किसी व्यक्तिगत दुर्भावना के कारण नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आलोचना को सकारात्मक रूप से स्वीकार करना चाहिए।
देवेंद्र फडणवीस का गृह विभाग पर नियंत्रण नहीं.
उन्होंने कहा कि जब सरकारी धन सीधे खातों में जमा होता है, तब भी भ्रष्टाचार कैसे हो सकता है? जिस प्रकार राम मंदिर की दानपेटी से दान, सोना, चांदी और नकदी चोरी हुई, उसी प्रकार महाराष्ट्र के सरकारी खजाने की भी लूट हुई है। इसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस का प्रशासन पर नियंत्रण नहीं है। फर्जी कर्मचारियों के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये निकाल लिए गए, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इस भ्रष्टाचार की जड़ें मंत्रालय की छठी मंजिल तक पहुंच चुकी हैं। उनके विभाग में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार फैला हुआ है। फर्जी कर्मचारी दिखाकर वेतन, भत्ते और अनुदान निकाले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि इस गंभीर मामले का वे क्या प्रायश्चित करेंगे।






























































































































































































