Amit Shah has come to Maharashtra not for a ‘Seva Sankalp Abhiyan’ (Service Pledge Campaign), but to play the final round of a ‘Meva Sankalp Abhiyan’ (Campaign to Secure the Spoils of Power): Harshvardhan Sapkal
Amit Shah has come to Maharashtra not for a ‘Seva Sankalp Abhiyan’ (Service Pledge Campaign), but to play the final round of a ‘Meva Sankalp Abhiyan’ (Campaign to Secure the Spoils of Power): Harshvardhan Sapkal

मुंबई:केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का महाराष्ट्र दौरा ‘सेवा संकल्प अभियान’ नहीं, बल्कि ‘मेवा संकल्प अभियान’ का आखिरी अंक खेलने के लिए है, ऐसी तीखी आलोचना महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के महाराष्ट्र दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली है, लेकिन आर्थिक राजधानी मुंबई है। इस आर्थिक राजधानी में आकर महाराष्ट्र से भारतीय जनता पार्टी को ज्यादा से ज्यादा ‘मेवा’ कैसे लूटा और खाया जा सके, इसकी साजिशें रचने के लिए ही अमित शाह का दो दिवसीय महाराष्ट्र दौरा दिखाई देता है।

महाराष्ट्र इस समय सूखे के गंभीर संकट से गुजर रहा है। किसान भारी संकट में है। ऐसी परिस्थिति में यदि अमित शाह वास्तव में महाराष्ट्र और किसानों की सेवा करना चाहते हैं, तो ‘मेवा’ लूटने की राजनीति में न पड़ते हुए किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी और प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये का मुआवजा घोषित करें। तभी उनके दो दिवसीय महाराष्ट्र दौरे का कोई अर्थ होगा। अन्यथा यह दौरा केवल राजनीतिक नाटक बनकर रह जाएगा।

महाराष्ट्र की जमीनें उद्योगपतियों को किस तरह दी गईं, उससे कितना पैसा जुटाया गया, अभी और कौन-कौन सी जमीनें बेचनी हैं और इस पूरी प्रक्रिया में कितना भ्रष्टाचार हुआ, इसका हिसाब लेने के लिए ही अमित शाह महाराष्ट्र आए हैं क्या? यह सवाल भी सपकाल ने उठाया।

कुंभ मेले के लिए किए गए हजारों करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब भी महाराष्ट्र की जनता के सामने आना चाहिए। कुंभ मेले के नाम पर हुए हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की समीक्षा कर उस पैसे का बंटवारा कैसे करना है, क्या इसी का जायजा इस दौरे में लिया जा रहा है? ऐसा सवाल सपकाल ने किया।

नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर महाराष्ट्र दौरे का कारण बताया जा रहा है, लेकिन वास्तव में यह दौरा भ्रष्टाचार का हिसाब करने और आने वाले समय में ‘मेवा’ के बंटवारे को तय करने के लिए है, ऐसा आरोप हर्षवर्धन सपकाल ने लगाया।

संघ का ‘लिबरल’ चेहरा डुप्लीकेट

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘लिबरल’ चेहरा डुप्लीकेट है। संघ ने अपने वास्तविक लक्ष्य और नीतियों को हमेशा छिपाकर रखा है। ‘Bunch of Thoughts’ को संघ की विचारधारा की महत्वपूर्ण पुस्तक माना जाता है, लेकिन वास्तव में संघ अपने इसी विचार और दर्शन को छिपाता है।

भारत का संविधान संघ को स्वीकार्य नहीं है, लेकिन संविधान को हमने स्वीकार किया है, ऐसा दिखाने का नाटक किया जाता है। भारत के तिरंगे का विरोध करने का इतिहास होने के बावजूद आज तिरंगा हमारा ही है, इस तरह की भूमिका अपनाई जाती है। इसलिए संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति संघ का प्रेम भी संदेह के घेरे में है, ऐसा सपकाल ने कहा।

विदेश जाने के बाद अलग भाषा, देश में अलग भूमिका और वास्तविक आचार-विचार-व्यवहार में अलग चेहरा—संघ और भाजपा की यह भूमिका बार-बार उजागर हुई है। आचार, विचार, व्यवहार और उच्चार में भी डुप्लीकेटपन बार-बार साबित हुआ है, ऐसा तंज सपकाल ने कसा।

संघ और भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में मुस्लिम विरोधी भूमिका लगातार दिखाई देती है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दस से अधिक इस्लामिक देशों के सर्वोच्च पुरस्कार स्वीकार किए हैं। यदि किसी विशेष धर्म के लोगों के प्रति सद्भावना नहीं है या उस धर्म का विरोध किया जाता है, तो फिर इन इस्लामिक देशों से मिले सर्वोच्च पुरस्कार स्वीकार करने का कारण क्या है? इस विरोधाभास का जवाब नरेंद्र मोदी और संघ को देना चाहिए, ऐसी मांग सपकाल ने की।

सेवा संकल्प अभियान नसून ‘मेवा संकल्प अभियाना’चा शेवटचा अंक खेळण्यासाठी अमित शहा महाराष्ट्रात : हर्षवर्धन सपकाळ

संघ की विचारधारा, संविधान के प्रति उसकी भूमिका और मुस्लिम समाज के प्रति उसके दृष्टिकोण पर संघ को स्पष्ट भूमिका रखनी चाहिए। विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को इसका सीधे तौर पर खुलासा करना चाहिए, ऐसी मांग महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की।

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