
मुंबई:नीट पेपर लीक मामले Neet paper leak 2026 तथा सीबीएसई और नीट परीक्षा प्रणाली की अव्यवस्था ने लाखों छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर दिया है। इस अन्याय के खिलाफ पूरे देश में आक्रोश है और हजारों छात्र सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे समय में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस CM Devendra fadnavis का यह कहना कि इस आंदोलन के पीछे कुछ राजनीतिक दलों का एजेंडा है, अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना और शर्मनाक है। वर्ष 2014 में दिल्ली में अन्ना हज़ारे के आंदोलन की आड़ लेकर भाजपा और आरएसएस ने अपना राजनीतिक एजेंडा चलाया था और देश में अराजकता का माहौल बनाया था। ऐसी मानसिकता रखने वालों को ही छात्रों के आंदोलन में एजेंडा दिखाई दे सकता है, ऐसा जवाब महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दिया।
भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कड़ी आलोचना करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना संविधान द्वारा दिया गया मौलिक अधिकार है। लेकिन जो लोग संविधान को ही नहीं मानते, उन्हें आंदोलन का महत्व कैसे समझ में आएगा? किसान आंदोलन के दौरान किसानों को खालिस्तानी, नक्सलवादी और आंदोलनजीवी कहकर बदनाम करने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर देवेंद्र फडणवीस तक पूरी भाजपा ने किया। सरकार से सवाल पूछने वालों को देशद्रोही साबित करना भाजपा का पुराना एजेंडा रहा है। जनता के सवालों का जवाब देने का साहस भाजपा सरकार में नहीं है। दिल्ली में बैठे फडणवीस के राजनीतिक आकाओं को स्वयं को तानाशाह समझने की आदत हो गई है। इसलिए संवाद, चर्चा और लोकतांत्रिक मूल्यों का उनके शासन में कोई स्थान नहीं बचा है। देवेंद्र फडणवीस को सार्वजनिक बयान देते समय संयम और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।
दिल्ली में छात्रों के साथ जानवरों की तरह बर्बर मारपीट की गई। 14-15 वर्ष के छात्रों तक को मोदी-शाह की पुलिस ने नहीं छोड़ा। छात्राओं के कपड़े फाड़े गए, उनके साथ अभद्र और अश्लील भाषा का प्रयोग किया गया। क्या देवेंद्र फडणवीस इस अमानवीय लाठीचार्ज का समर्थन करते हैं? यह कहना कि पुलिस ने अराजकता फैलाने की कोशिश को विफल किया, उनका एक और हास्यास्पद और गैर-जिम्मेदाराना बयान है। सरकार स्थिति को संभालने में पूरी तरह विफल रही है क्योंकि मोदी सरकार लोकतांत्रिक तरीके से शासन चलाना ही नहीं चाहती। कांग्रेस सरकार के समय आंदोलनों पर संवाद होता था, प्रदर्शनकारियों से बातचीत की जाती थी और आवश्यकता पड़ने पर मंत्रियों के इस्तीफे भी लिए जाते थे। यह बात देवेंद्र फडणवीस अच्छी तरह जानते हैं।




























































































































































































