
मुंबई/नाशिक:राज्य में पुणे, नाशिक, वर्धा, पालघर सहित कई स्थानों पर आदिवासी छात्र पिछले 13 दिनों से अनशन कर रहे हैं। राज्य की भाजपा महायुति सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन आदिवासी छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देने के लिए उसके पास समय नहीं है। कल मंत्रिमंडल की बैठक हुई, लेकिन उसमें भी आदिवासी छात्रों की समस्याओं पर कोई चर्चा नहीं हुई। भाजपा महायुति सरकार आदिवासी विरोधी है। आदिवासी छात्रों की मांगों को तत्काल स्वीकार किया जाए, अन्यथा कांग्रेस को सड़कों पर उतरना पड़ेगा, ऐसी चेतावनी कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दी है।
नाशिक में अनशन पर बैठे आदिवासी छात्रों से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मुलाकात की। इस अवसर पर सांसद शोभा बच्छाव, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहन जोशी सहित पार्टी के पदाधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि आदिवासी विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार करने के बावजूद छात्रों को किसी भी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। छात्र 10-12 दिनों से अनशन पर बैठे हैं, लेकिन भाजपा महायुति सरकार के एक भी मंत्री को उनकी सुध लेने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले में व्यक्तिगत रूप से ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। आदिवासी छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और उन्हें मंजूर किया जाना चाहिए। यह सरकार आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों के समाज की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। अनशन पर बैठे छात्रों को यदि कुछ होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की होगी।
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आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके कह रहे हैं कि राहुल गांधी को आदिवासियों की समस्याओं की अद्यतन जानकारी नहीं है। लेकिन जिस विभाग के आप मंत्री हैं, क्या आपको उस विभाग की जानकारी है? 13 दिनों से आप सो रहे थे क्या? सवाल आदिवासी छात्रों की मांगों का है। सवाल यह भी है कि मेडिकल जांच के नाम पर छात्राओं का प्रेग्नेंसी टेस्ट किया जाता है। लेकिन मंत्री महोदय इन गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय किसी और मुद्दे पर बात कर रहे हैं। यही मंत्री महोदय अनशन पर बैठे छात्रों से कहते हैं कि, “मैं कुछ नहीं कर सकता, सॉरी, आप मुख्यमंत्री से मिलिए।” और मुख्यमंत्री के पास भी इस अनशन की दखल लेने के लिए समय नहीं है। ऐसे लोगों को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है, ऐसा भी हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।



























































































































































































