
मुंबई:भाजपा सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रखा है। पेपर लीक से परेशान विद्यार्थियों को MPSC के लचर कारभार का भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। MPSC के कारभार के विरोध में लाखों विद्यार्थी सड़कों पर उतरने के बावजूद सरकार की नींद नहीं खुल रही है। राज्य सरकार को इसमें हस्तक्षेप कर MPSC के अध्यक्ष और सचिव को बर्खास्त करना चाहिए। लेकिन क्या अध्यक्ष मुख्यमंत्री के ‘खास’ होने के कारण ही उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है?, यह सवाल महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने उठाया है।
तिलक भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि MPSC के अराजक कारभार को लेकर कांग्रेस पार्टी लगातार विद्यार्थियों के साथ खड़ी रही है और उनकी आवाज उठाती रही है। लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है। MPSC के इस लचर कारभार से तंग आकर और निराशा में धाराशिव जिले के विद्यार्थी प्रथमेश देशमुख ने अपना जीवन समाप्त कर लिया। यह घटना बेहद गंभीर और आक्रोश पैदा करने वाली है। प्रथमेश देशमुख ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि वह सरकार और MPSC की उदासीनता का शिकार हुए हैं। इस मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए, यह मांग कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने की है। MPSC में भारी अराजकता होने के बावजूद सरकार उस पर ध्यान नहीं दे रही है और MPSC के अध्यक्ष इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। ‘मेरा पेपर लीक से कोई संबंध नहीं है’, ऐसा जवाब देना उनका निर्लज्ज रवैया है।
SIR एक भस्मासुर; 3 करोड़ मतदाता बाहर किए गए?
चुनाव आयोग ने SIR अभियान चलाकर लोकतंत्र का गला घोंटने का काम किया है। भाजपा की मदद के लिए चुनाव आयोग काम कर रहा है, यह SIR अभियान से स्पष्ट हो रहा है। पश्चिम बंगाल में 91 लाख मतदाताओं को बाहर किया गया था और अब यही बंगाल पैटर्न महाराष्ट्र में भी लागू किया जा रहा है। राज्य में SIR अभियान के तहत 3 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम विभिन्न कारणों से बाहर किए गए हैं। इनमें 2 करोड़ 6 लाख मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाता (ASDD) के रूप में बाहर किया गया है। वहीं 1 करोड़ 22 लाख मतदाताओं को ‘Anomaly’ और ‘Unmapped’ के नाम पर संदिग्ध श्रेणी में डाल दिया गया है। इनमें से अधिकांश मतदाताओं के नाम हटाए जाने की संभावना है। ऐसे में 9 करोड़ 78 लाख मतदाताओं में से 3 करोड़ 28 लाख मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं, ऐसा मौजूदा स्थिति से दिखाई दे रहा है। 1 करोड़ 22 लाख मतदाताओं को ‘Anomaly’ और ‘Unmapped’ सूची में रखा गया है, लेकिन चुनाव आयोग यह सूची सार्वजनिक नहीं कर रहा है। भाजपा चुनाव आयोग की मदद से ‘वोट चोरी’ कर रही है, कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों में तथ्य है, यह इससे स्पष्ट होता है। इन मतदाताओं के नाम क्यों हटाए जा रहे हैं, इसका चुनाव आयोग को स्पष्टीकरण देना चाहिए।
कांग्रेस पार्टी की मांगें..
चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए 30 सितंबर तक की समयसीमा दी है। लेकिन इस अवधि में गौरी-गणपति सहित कई त्योहार और उत्सव हैं। त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने गांव जाते हैं, जिससे दावे और आपत्तियां दर्ज कराने में कठिनाई होगी। इसे ध्यान में रखते हुए यह समयसीमा 30 नवंबर तक बढ़ाई जाए।
‘Anomaly’ और ‘Unmapped’ मतदाताओं की सूची बूथवार प्रकाशित कर राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाए। इन मतदाताओं को WhatsApp के माध्यम से नोटिस देने के बजाय प्रत्यक्ष रूप से नोटिस दिया जाए। सुनवाई प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 3-4 स्थानों पर करने के बजाय मतदान केंद्र स्तर पर की जाए। ‘Anomaly’ में सुधार के संबंध में सूची भी सार्वजनिक की जाए। ये कांग्रेस पार्टी की प्रमुख मांगें हैं, ऐसा भी सपकाल ने कहा।
राज्य में सूखा घोषित करें…
बारिश के मुंह मोड़ लेने से खरीफ का मौसम पूरी तरह बर्बाद हो गया है। खेतों में खड़ी फसलें सूख गई हैं और किसान परेशान हैं। भाजपा सरकार की किसान कर्जमाफी खोखली साबित हुई है और फसल बीमा की राशि भी किसानों को नहीं मिली है। किसानों की स्थिति को देखते हुए सरकार तत्काल राज्य में सूखा घोषित करे तथा रबी मौसम के लिए बीज और खाद मुफ्त उपलब्ध कराए, यह मांग भी कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की है।
आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा सरकार कर रही है धोखाधड़ी.
भाजपा महायुति सरकार ने मराठा, धनगर, OBC, आदिवासी सहित कई समाजों के साथ आरक्षण के नाम पर गंभीर धोखाधड़ी की है। मराठा समाज को आरक्षण देने की घोषणा करके दो बार जश्न मनाया गया। एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस ने मनोज जरांगे को कौन-कौन से आश्वासन दिए थे, उन्हें सार्वजनिक किया जाए।
दो बार जश्न मनाने के बाद भी उपवास और आंदोलन करने की नौबत क्यों आई? सरकार की नीयत साफ नहीं है। कांग्रेस गठबंधन सरकार ने वर्ष 2014 में ही मराठा समाज को आरक्षण दिया था, लेकिन उसके बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार ने इसे लागू नहीं किया। आरक्षण का प्रश्न वास्तव में हल करना है तो जातिगत जनगणना ही इसका एकमात्र समाधान है, ऐसा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।




























































































































































































