
मुंबई:जातिवार जनगणना सभी जातियों के हित में है। जातियों की स्पष्ट और वास्तविक संख्या सामने आएगी, तभी प्रत्येक वर्ग को न्याय दिया जा सकेगा। इसी उद्देश्य से कांग्रेस पार्टी लगातार जातिवार जनगणना की मांग करती रही है। देर से ही सही, लेकिन मोदी सरकार ने जातिवार जनगणना की घोषणा की है। हालांकि, इसमें कुछ खामियां हैं। जनगणना के फॉर्म में SC/ST के लिए अलग से उल्लेख किया गया है, लेकिन OBC वर्ग के लिए अलग कॉलम का प्रावधान नहीं किया गया है। इस जनगणना में OBC वर्ग के लिए स्पष्ट कॉलम होना चाहिए और जातिवार जनगणना तेलंगाना पैटर्न के आधार पर की जानी चाहिए, ऐसी मांग कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य एवं मध्य प्रदेश के प्रभारी विधायक हरीश चौधरी ने की है।
तिलक भवन में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल एवं मध्य प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की संयुक्त पत्रकार परिषद आयोजित की गई। पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि वर्ष 2021 में ही जनगणना होनी चाहिए थी, लेकिन कोविड का कारण बताकर इसे टाल दिया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जातिवार जनगणना की मांग लगातार उठाई, जिसके कारण अंततः वर्ष 2026 में जनगणना की जा रही है।
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“जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” कांग्रेस पार्टी की भूमिका है। देश में सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक समाज के वर्ग को उसकी जनसंख्या के अनुपात में मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह नारा दिया था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “अर्बन नक्सल” की सोच बताते हुए इस मांग को नजरअंदाज किया था।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जातिवार जनगणना कराने के संबंध में बार-बार पत्र लिखे, लेकिन प्रधानमंत्री ने उन पत्रों का भी जवाब नहीं दिया। कांग्रेस द्वारा लगातार किए गए प्रयासों के कारण मोदी सरकार को वर्ष 2025 में जातिवार जनगणना के लिए अधिसूचना जारी करनी पड़ी।
जातिवार जनगणना की घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन मोदी सरकार जातिवार जनगणना के मूल उद्देश्य से भटक रही है। मोदी सरकार वास्तव में जातिवार जनगणना के माध्यम से सामने आने वाले सटीक आंकड़े देश के सामने नहीं लाना चाहती। देश के हित में यह जानना बेहद जरूरी है कि समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व कितना है। इसी आंकड़े के आधार पर सरकार विभिन्न योजनाएं और नीतियां बना सकती है।
जातियों से संबंधित सटीक जानकारी उपलब्ध होने के बाद ही विभिन्न समाजों और वर्गों को उनका हक और उचित हिस्सेदारी मिल सकेगी तथा सामाजिक न्याय का उद्देश्य पूरा होगा। यदि उचित जातिवार जनगणना के माध्यम से इसमें सुधार नहीं किया गया, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान वंचित वर्गों को ही उठाना पड़ेगा।
बिहार की तत्कालीन नीतीश कुमार सरकार और तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने इससे पहले ही जातिवार जनगणना कराकर देश के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है। जातिवार जनगणना होने पर ही समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय दिया जा सकता है।
वर्तमान में पहाड़ी क्षेत्रों में जनगणना शुरू हो चुकी है और शेष देश में फरवरी से जनगणना शुरू होने वाली है। इसलिए सरकार के पास अभी भी समय है। जनगणना में OBC वर्ग के लिए स्पष्ट कॉलम शामिल किया जाए और तेलंगाना पैटर्न के अनुसार जातिवार जनगणना कराई जाए, ऐसी मांग भी हरीश चौधरी ने की।




























































































































































































