
Budget 2026: देश में आम बजट की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं. वित्त मंत्रालय में हलचल तेज हो चुकी है और हर बार की तरह इस साल भी 1 फरवरी को देश का बही-खाता संसद में पेश किया जाएगा. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बजट पेश करने के लिए 1 फरवरी की तारीख ही क्यों चुनी जाती है? यह सवाल अक्सर आम आदमी के मन में उठता है. इसके अलावा, आगामी बजट 2026 से नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय परिवारों को टैक्स में राहत की क्या उम्मीदें हैं, यह जानना भी बेहद जरूरी है.
अंग्रेजों के जमाने की परंपरा कैसे बदली
भारतीय इतिहास में बजट पेश करने की तारीख हमेशा से 1 फरवरी नहीं थी. साल 2017 से पहले तक, केंद्रीय बजट फरवरी महीने के आखिरी दिन पेश किया जाता था. यह एक ऐसी परंपरा थी जो ब्रिटिश हुकूमत के समय से चली आ रही थी और आजादी के दशकों बाद तक इसे ऐसे ही निभाया गया. लेकिन साल 2017 में मोदी सरकार ने इस पुरानी परिपाटी को तोड़ने का फैसला किया.
तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बदलाव की नींव रखी और बजट पेश करने की तारीख को फरवरी के अंत से हटाकर 1 फरवरी कर दिया. इसके पीछे सरकार का तर्क बेहद व्यावहारिक था. दरअसल, भारत में नया वित्तीय वर्ष (Financial Year) 1 अप्रैल से शुरू होता है. जब बजट फरवरी के अंत में पेश होता था, तो संसद में उस पर चर्चा और उसे पास कराने की प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था. कई बार तो मई या जून तक का वक्त निकल जाता था, जिससे नई योजनाओं के लिए पैसा जारी होने में देरी होती थी. 1 फरवरी को बजट पेश होने से सरकार को दो महीने का अतिरिक्त समय मिल जाता है, जिससे 1 अप्रैल से ही सभी नए प्रावधान और फंड आवंटन सुचारू रूप से लागू हो सकें.






























































































































































































