What happened to the promise of completely waiving farmers' 7/12 land record dues? Chief Minister Devendra Fadnavis must answer the farmers directly: Atul Londhe
What happened to the promise of completely waiving farmers' 7/12 land record dues? Chief Minister Devendra Fadnavis must answer the farmers directly: Atul Londhe

मुंबई: राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। तस्वीर यह है कि यह स्थिति 1972 के भीषण अकाल से भी गंभीर है। किसान बड़े संकट में है और सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन भाजपा की फडणवीस सरकार अभी भी अध्ययन करने में ही व्यस्त है। किसानों का आक्रोश देखते हुए आखिरकार मुख्यमंत्री किसानों के खेतों की मेड़ तक पहुंचे हैं, लेकिन इसका क्या फायदा? भाजपा सरकार ने चुनाव के दौरान किसानों का 7/12 पूरी तरह कोरा करने का वादा किया था, उसका क्या हुआ? इसका जवाब स्वयं मुख्यमंत्री महोदय किसानों को दें, ऐसी चुनौती कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने दी है।

मुख्यमंत्री के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि भाषणों के जरिए केवल राजनीति की जा सकती है, लेकिन वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने का साहस भाजपा महायुति सरकार में नहीं है। मराठवाड़ा की अगली पीढ़ी को अकाल नहीं देखना पड़ेगा, इस बयान को स्वयं देवेंद्र फडणवीस अब तक कई बार दोहरा चुके हैं। आज वे किसानों के खेतों की मेड़ तक पहुंचे हैं, यह अच्छी बात है और हम इसका स्वागत करते हैं।

उन्होंने कहा कि यह 1972 के बाद का सबसे बड़ा अकाल है। लेकिन 1972 के अकाल से कांग्रेस सरकार ने सबक लिया और रोजगार गारंटी योजना को जन्म दिया। इस योजना ने लाखों लोगों को रोजगार दिया। आगे चलकर केंद्र सरकार ने इसी योजना को स्वीकार किया, कानून बनाया और यह मनरेगा बनी। कोरोना महामारी के दौरान भी मनरेगा ने लाखों लोगों को रोजगार दिया। लेकिन भाजपा सरकार लगातार मनरेगा को कमजोर करने का काम करती रही है। मनरेगा के बजट में बड़े पैमाने पर कटौती की गई और अब भाजपा सरकार इस योजना को ही खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।

अतुल लोंढे ने कहा कि राज्य में इससे पहले भी अतिवृष्टि आई, अकाल पड़ा। भाजपा सरकार ने वास्तव में किसानों की कितनी मदद की, यह मुख्यमंत्री को बताना चाहिए। कितनी सहायता किसानों तक पहुंची, यह मुख्यमंत्री किसानों से ही पूछें। भाजपा महायुति सरकार ने किसानों की जो कर्जमाफी की, वह भी फर्जी और धोखाधड़ी साबित हुई, यही बात किसानों से सुनने को मिलेगी। क्या भाजपा सरकार इससे कोई सबक लेगी? क्या आप कुछ नया खड़ा करने वाले हैं? अकाल का सामना किया जा सके, इसके लिए सरकार के पास कौन-सी ठोस योजनाएं हैं? वर्ष 2014 में घोषित 49 हजार करोड़ रुपये की वॉटर ग्रिड योजना का क्या हुआ?

शेतकऱ्यांचा ७/१२ पूर्णपणे कोरा करण्याच्या आश्वासनाचे काय झाले? मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणविसांनी शेतकऱ्यांनाच सांगावे: अतुल लोंढे

कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसानों के लिए विभिन्न योजनाएं लाई गईं और उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी किया गया। शरद पवार साहब के मुख्यमंत्री रहते कम पानी में भी टिक सकने वाली बागवानी योजना लाई गई और इसके बाद महाराष्ट्र में फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में बड़ी क्रांति हुई। भाजपा सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में ऐसा कोई उल्लेखनीय काम दिखाई नहीं देता।

आज आप किसानों के खेतों की मेड़ तक पहुंचे हैं। किसानों की समस्याएं आपको करीब से दिखाई दी होंगी और उनका दर्द भी समझ में आया होगा। ऐसे में शायद कुछ अच्छा होगा, ऐसी उम्मीद करते हैं। अन्यथा फिर वही स्थिति—‘ये रे माझ्या मागल्या’, यानी पहले जैसी ही कहानी दोहराई न जाए, ‘रात का हंगामा ही बेहतर था’ जैसी स्थिति न बने, यही हमारी अपेक्षा है, ऐसा भी कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा।

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