नई दिल्ली : चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत देश के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से करीब 13.37 करोड़ नाम हटाए गए हैं। यह आंकड़ा संबंधित राज्यों में पुनरीक्षण (SIR) से पहले की मतदाता सूचियों और ड्राफ्ट सूची के बीच के अंतर पर आधारित है।
SIR की प्रक्रिया बिहार से शुरू हुई थी और बाद के चरणों में अन्य राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को इसमें शामिल किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कुल मिलाकर करीब 14.1 प्रतिशत मतदाता नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए हैं। महाराष्ट्र में भी मतदाता संख्या में करीब 21.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि दिल्ली में यह कमी करीब 32.8 प्रतिशत रही।
किन कारणों से हटाए गए नाम?
पुनरीक्षण प्रक्रिया में अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत या दोहरे पंजीकरण जैसी श्रेणियों की प्रविष्टियों की जांच की जा रही है। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अद्ययावत और अधिक अचूक बनाने के लिए यह प्रक्रिया की जा रही है।
हालांकि, बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न पक्षों ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने 24 सितंबर को आरोप लगाया कि SIR के कारण करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। ये राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें चुनाव आयोग के आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अंतिम सूची से पहले मौका
केंद्र सरकार के अनुसार, पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटने से रोकने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा सत्यापन, ड्राफ्ट सूची का प्रकाशन तथा दावे और आपत्तियां दाखिल करने की व्यवस्था रखी गई है। वैध दावे मिलने पर नाम अंतिम सूची में बहाल किए जा सकते हैं।
मतदाता अपना नाम चुनाव आयोग के Voters’ Services Portal पर भी जांच सकते हैं।





























































































































































































