
मुंबई:फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी की घटना ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। अगर मुंबई जैसे महानगर में दिनदहाड़े किसी अभिनेता पर गोलीबारी होती है, तो क्या पुलिस प्रशासन सो रहा है? बताया जा रहा है कि यह हमला लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने किया है। लेकिन यह गैंगस्टर गुजरात की जेल में बंद है। अगर वह जेल में रहते हुए भी ऐसी वारदातों को अंजाम दे रहा है, तो यह सरकार के आशीर्वाद के बिना संभव नहीं है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खोखली घोषणाएँ करने के बजाय बिश्नोई को गिरफ्त में लेकर मुंबई लाने, उससे पूछताछ करने और उसके खिलाफ मुकदमा चलाने की हिम्मत दिखानी चाहिए। यह चुनौती कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दी है।
राज्य की कानून-व्यवस्था पर बोलते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि मुंबई पुलिस का दबदबा और उसकी प्रतिष्ठा अब इतिहास बन चुकी है। पुलिस की दादागिरी सिर्फ विपक्षी दलों के नेताओं और छात्रों पर कार्रवाई करने तक सीमित रह गई है। अपराधियों पर उसका कोई खौफ नहीं रह गया है। सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि पुणे, ठाणे और नागपुर में भी खुलेआम अपराध हो रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस कुछ नहीं कर पा रहे हैं। वे महाराष्ट्र के इतिहास के सबसे निष्क्रिय गृहमंत्री हैं।
पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई, अभिनेता सलमान खान के घर पर हमला हुआ और फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर पर भी हमला किया गया। इन सभी घटनाओं में बिश्नोई गैंग का हाथ होने की बात सामने आई। फिर अब तक इस माफिया से पूछताछ क्यों नहीं की गई? महाराष्ट्र पुलिस के हाथ किसने बाँध रखे हैं?
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के गृह मंत्रालय द्वारा अगस्त 2023 में जारी एक आदेश के अनुसार, दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 268 का इस्तेमाल करते हुए लॉरेंस बिश्नोई को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। इस प्रावधान के तहत किसी भी राज्य की पुलिस लॉरेंस बिश्नोई को पूछताछ के लिए गुजरात से बाहर नहीं ले जा सकती। इस आदेश का हर साल एक वर्ष की अवधि के लिए नवीनीकरण किया जाता है। इसके कारण बिश्नोई को संरक्षण मिल रहा है और वह जेल में बैठकर लोगों की हत्याएँ करवा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा उसे दिया गया यह कानूनी संरक्षण वापस लेने की माँग महाराष्ट्र सरकार को करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री फडणवीस कहते हैं कि बिश्नोई के आका के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, लेकिन ऐसी खोखली धमकियाँ जनता पहले भी कई बार सुन चुकी है। अहमदाबाद की जेल से बिश्नोई गैंग चलाता है और उस पर कार्रवाई नहीं होती—आखिर यह क्या मामला है? असम पुलिस दिल्ली जाकर विपक्षी दल के नेता को गिरफ्तार कर सकती है। असम पुलिस गुजरात जाकर विपक्ष के विधायक को गिरफ्तार कर सकती है। बिहार में जीरो एफआईआर दर्ज करके मुंबई की घटना की सीबीआई जाँच कराई जा सकती है, तो फिर अहमदाबाद की जेल में बंद बिश्नोई से पूछताछ क्यों नहीं होती? इसका जवाब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को देना चाहिए।
राज्य की कानून-व्यवस्था की धज्जियाँ फडणवीस सरकार पहले ही उड़ा चुकी है। दूसरों की गलतियाँ निकालने से पहले देवेंद्र फडणवीस को अपने शासन की समीक्षा करनी चाहिए और उसके बाद बोलना चाहिए।
मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस को सिर्फ ‘वसूली’ करने और विपक्षी दलों के नेताओं पर कार्रवाई करने का काम सौंप रखा है। बुलढाणा जिले के कांग्रेस के पूर्व विधायक राहुल बोंद्रे ने भाजपा में प्रवेश नहीं किया, इसलिए अब उनके पीछे पुलिस जाँच का शिकंजा कस दिया गया है। गैंगस्टरों, उनके आकाओं, खोकेबाजों, ड्रग्स माफिया और रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत महायुति सरकार में नहीं है। ऐसी सरकार को सत्ता की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए, ऐसा भी हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।































































































































































































