बच्चों का ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल नींद, ध्यान, व्यवहार और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। जानिए मोबाइल की आदत कम करने के आसान तरीके।
मोबाइल बना बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा
मोबाइल फोन ने बच्चों की पढ़ाई और मनोरंजन को आसान बनाया है, लेकिन जब स्क्रीन का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा होने लगे तो माता-पिता की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। बच्चा बार-बार मोबाइल मांगता है, फोन नहीं मिलने पर चिड़चिड़ा होता है या मोबाइल छोड़कर दूसरी गतिविधियों में रुचि नहीं लेता, तो उसके स्क्रीन इस्तेमाल पर ध्यान देने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार समस्या केवल यह नहीं है कि बच्चा दिन में कितने घंटे स्क्रीन देख रहा है। यह भी देखना जरूरी है कि मोबाइल की वजह से उसकी नींद, खेलकूद, पढ़ाई, परिवार के साथ समय और दूसरी जरूरी गतिविधियां प्रभावित तो नहीं हो रही हैं।
ध्यान और व्यवहार पर पड़ सकता है असर
लगातार तेज गति वाले वीडियो, गेम और लगातार बदलती डिजिटल सामग्री बच्चे को तुरंत मिलने वाले मनोरंजन की आदत डाल सकती है। इसके बाद सामान्य गतिविधियां उसे कम आकर्षक लग सकती हैं। मोबाइल बंद करने पर विरोध, चिड़चिड़ापन या रोना इसी बदलाव के दौरान दिखाई दे सकता है।
हालांकि, हर बच्चे पर स्क्रीन का असर एक जैसा नहीं होता। बच्चे की उम्र, व्यक्तित्व, घर का वातावरण, स्क्रीन पर देखी जाने वाली सामग्री और मोबाइल इस्तेमाल करने का तरीका भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नींद सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती है
रात में मोबाइल इस्तेमाल करने से बच्चे के सोने का समय आगे बढ़ सकता है। देर तक स्क्रीन देखने के कारण पर्याप्त नींद न मिलने पर अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। इसलिए सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
मोबाइल की आदत कम कैसे करें?
माता-पिता को मोबाइल अचानक छीनने के बजाय पहले से स्पष्ट नियम बनाने चाहिए। बच्चे को बताएं कि मोबाइल कितनी देर इस्तेमाल करना है और समय पूरा होने से कुछ मिनट पहले उसे सूचना दें।
मोबाइल के बदले बच्चे को खेल, ड्राइंग, किताबें, संगीत या परिवार के साथ कोई गतिविधि करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नियम केवल बच्चों के लिए न हों। माता-पिता भी भोजन और परिवार के समय मोबाइल का इस्तेमाल कम करें।
कब विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए?
यदि मोबाइल इस्तेमाल को लेकर बच्चे का व्यवहार लगातार बहुत ज्यादा आक्रामक हो रहा है, उसकी नींद, पढ़ाई, सामाजिक गतिविधियां या पारिवारिक संबंध गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं और घर के नियमों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या बाल मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना उचित हो सकता है।
निष्कर्ष: मोबाइल बच्चों के लिए पूरी तरह खराब नहीं है। असली चुनौती है उसका संतुलित और उद्देश्यपूर्ण इस्तेमाल। माता-पिता का शांत व्यवहार, स्पष्ट नियम और मोबाइल के अलावा दूसरी गतिविधियों को बढ़ावा देना बच्चों की स्क्रीन आदत को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।































































































































































































