
मुंबई:जाति व्यवस्था ने समाज में जातियों के बीच विवाद और वैमनस्य पैदा किया है। जाति व्यवस्था की संरचना में ओबीसी समाज को निचला स्थान देकर मनुवादियों ने उसका शोषण किया है। जाति व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लंबी है, लेकिन अब इसमें बदलाव आना चाहिए। इसी उद्देश्य से राहुल गांधी ने जाति आधारित जनगणना के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया है। प्रत्येक समाज की जनसंख्या कितनी है, उसके अनुपात में उसे प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर राहुल गांधी ने जाति आधारित जनगणना पर जोर दिया और आखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाति आधारित जनगणना का निर्णय घोषित करना पड़ा। यह प्रतिपादन महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद ने किया।
कांग्रेस मुख्यालय तिलक भवन में आज ओबीसी कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर एवं ‘मंडल बनाम मनुवाद’ पुस्तक का विमोचन महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सचिव रेहाना चिस्ती, प्रदेश कांग्रेस ओबीसी विभाग के अध्यक्ष प्रा. यशपाल भिंगे, सांसद प्रतिभा धानोरकर, प्रवक्ता हनुमंत पवार सहित अन्य नेता उपस्थित थे।
इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि महाराष्ट्र में आरक्षण की मांग को लेकर विभिन्न समाजों के आंदोलन चल रहे हैं। आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा बढ़ाना और जाति आधारित जनगणना कराना ही इसका सबसे कारगर समाधान है, लेकिन भाजपा सरकार ऐसा नहीं कर रही है। राज्य में आरक्षण की मांग उठ रही है, वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाकर मराठा और ओबीसी समाज के बीच विवाद पैदा कर दिया है। यदि फडणवीस सरकार ने कांग्रेस गठबंधन सरकार द्वारा मराठा समाज को दिए गए आरक्षण को आगे भी जारी रखा होता, तो आज ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
इस अवसर पर विजय वडेट्टीवार ने कहा कि ओबीसी समाज भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा रहा, लेकिन भाजपा ने इस समाज को कुछ भी नहीं दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ओबीसी समाज के अधिकारों के लिए सबसे पहले आवाज उठाई। राहुल गांधी द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जाति आधारित जनगणना की घोषणा की। मंडल आयोग ने ओबीसी समाज के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी। यह आरक्षण सामाजिक और शैक्षणिक अवसरों के साथ-साथ सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व के लिए था। लेकिन मंडल आयोग के आंदोलन में घुसपैठ कर मनुवादियों ने ओबीसी समाज में भ्रम फैलाया। मनुवादी विचारधारा ने जातियों के बीच नफरत का जहर घोलने का काम किया है। मनुवाद की इस विचारधारा को केवल समानता का विचार ही समाप्त कर सकता है, ऐसा वडेट्टीवार ने कहा।
इस अवसर पर प्रा. यशपाल भिंगे ने कहा कि देश में ओबीसी समाज को एक पहचान और चेहरा देने का महत्वपूर्ण कार्य बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बी. पी. मंडल ने किया। जिस दौर में ओबीसी समाज की कोई स्पष्ट पहचान नहीं थी, उस समय बी. पी. मंडल ने उसे एक स्पष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने अथक परिश्रम कर आंकड़े जुटाए और ओबीसी समाज के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की। अब ओबीसी समाज केवल मतदान करने वाला नहीं, बल्कि नेतृत्व करने वाला समाज बनना चाहिए। इसी उद्देश्य से ‘हर एक ओबीसी, बनेगा कांग्रेसी’ का संकल्प लिया गया है, ऐसा प्रा. भिंगे ने कहा।
उन्होंने यह भी बताया कि ‘मंडल बनाम मनुवाद’ पुस्तक को इस उद्देश्य से लिखा गया है कि आम कार्यकर्ता भी इसके विचारों और विषयों को आसानी से समझ सके।

























































































































































































