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Sonam Wangchuk: लेह पुलिस ने सोनम वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया है. उन पर इलाके में हिंसा भड़काने का आरोप है. हालात को देखते हुए लेह में इंटरनेट सेवा तुरंत बंद कर दी गई. लेह पुलिस के मुताबिक, 24 सितंबर को प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाने के आरोप में कई एफआईआर दर्ज की गई थीं. इसके बाद शुक्रवार को वांगचुक को गिरफ्तार किया गया.
NSA के तहत क्यों हुई सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी?

  • सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी इस समय बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है. सरकार का मानना है कि फिलहाल उनके पक्ष में ज्यादा फैक्टर्स नहीं हैं.
  • इस गिरफ्तारी का मकसद आगे की गति रोकना है. SECMOL के खिलाफ कार्रवाई और NGO फंडिंग लाइसेंस रद्द होने ने भी जांच की वजहें बढ़ाई हैं.
  • हाल ही में हुए हिंसक घटनाक्रम और कारोबार में हुए नुकसान ने उनके समर्थन को सीमित कर दिया है. जनता का व्यापक समर्थन उनके साथ नहीं है.
  • सरकार के लिए यह भी जरूरी था कि कड़े कदम उठाने पर राजनीतिक कीमत कम हो. पहले से हुई मौतें और आगजनी के बाद राज्य को नियंत्रण दिखाना जरूरी था.
  • वांगचुक इस आंदोलन का प्रतीकात्मक चेहरा रहे हैं. उन्हें NSA के तहत गिरफ्तार करने से आंदोलन की तेजी से संगठित होने की क्षमता कमजोर हुई है.
  • सरकार को डर है कि अगर उन्हें छोड़ दिया जाता तो ज्यादा प्रदर्शन, भाषण और नई अशांति हो सकती थी. इसलिए यह रोकथाम के तौर पर किया गया कदम है.
  • लद्दाख की स्टेटहुड की मांग और छठी अनुसूची के मुद्दे केंद्र सरकार के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं. ऐसे में यह कार्रवाई सिग्नल देती है कि राज्य और केंद्र नियंत्रण बनाए रखने के लिए सक्रिय हैं.
  • सोनम वांगचुक ने 10 सितंबर को लेह शहर में अनशन शुरू किया था. उनकी मांग थी कि लद्दाख क्षेत्र को छठी अनुसूची में शामिल किया जाए, राज्य का दर्जा दिया जाए और क्षेत्र के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. हालांकि 24 सितंबर को उनका अनशन उस समय खत्म हुआ जब शहर में हिंसा फैल गई. भीड़ ने सुरक्षाबलों पर पथराव किया. सीआरपीएफ के एक वाहन को आग लगा दी गई. भाजपा कार्यालय और लेह की प्रमुख संस्था के कार्यालय में भी आग लगी. डीजीपी के वाहन को प्रदर्शनकारियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया. 
    स्थिति बेकाबू होने पर सुरक्षा बलों ने फायरिंग की. इसमें चार प्रदर्शनकारी मारे गए और करीब 70 लोग घायल हुए. कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए लेह शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया. गुरुवार शाम को कारगिल में भी कर्फ्यू लगाया गया. कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया.
    सोनम वांगचुक ने आरोपों पर क्या कहा?
    गृह मंत्रालय ने एफसीआरए अधिनियम का उल्लंघन करते हुए स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) के संस्थापक सोनम वांगचुक का एफसीआरए पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिया.
    वांगचुक ने आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने बताया कि उनके गैर-लाभकारी संगठन ने विदेशी चंदा नहीं लिया है. उनके अनुसार, संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, स्विस और इतालवी संस्थाओं के साथ व्यावसायिक लेन-देन किए हैं और सभी करों का भुगतान किया है. उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार ने इसे विदेशी चंदा समझ लिया. मैं इसे उनकी गलती मानता हूं और इसलिए मुझे कोई आपत्ति नहीं है.”
    पुलिस ने कुछ नेपाली नागरिकों और जम्मू क्षेत्र के डोडा के लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है. ये लोग हिंसा में शामिल पाए गए थे. अब कई घायल प्रदर्शनकारी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं.

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