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माइग्रेन एक प्रकार का न्यूरोलॉजिकल रोग है, जिसमें बार-बार सिरदर्द के दौरे पड़ सकते हैं। कई लोगों में दर्द सिर के एक हिस्से में अधिक होता है और इसके साथ मतली, उल्टी तथा रोशनी या तेज आवाज से परेशानी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

माइग्रेन का दर्द सामान्य सिरदर्द से अलग हो सकता है और कुछ लोगों में कई घंटों से लेकर कई दिनों तक रह सकता है।

माइग्रेन किन लोगों को ज्यादा होता है?

माइग्रेन किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन महिलाओं में यह पुरुषों की तुलना में अधिक पाया जाता है। परिवार में किसी अन्य व्यक्ति को माइग्रेन होने पर भी इसका जोखिम बढ़ सकता है।

कुछ लोगों में माइग्रेन के दौरे विशेष परिस्थितियों में अधिक हो सकते हैं, जैसे—

– नींद पूरी न होना
– बहुत अधिक तनाव
– तेज रोशनी या तेज आवाज
– लंबे समय तक खाना न खाना
– पानी की कमी
– मौसम में बदलाव
– बहुत ज्यादा कैफीन या अचानक कैफीन छोड़ना
– कुछ खाद्य पदार्थ
– हार्मोन में बदलाव

हर व्यक्ति के माइग्रेन के ट्रिगर अलग हो सकते हैं।

माइग्रेन किस उम्र में होता है?

माइग्रेन किसी भी उम्र में शुरू हो सकता है, लेकिन अक्सर इसकी शुरुआत किशोरावस्था या युवावस्था में होती है। बच्चों में भी माइग्रेन हो सकता है।

महिलाओं में हार्मोनल बदलावों के कारण मासिक धर्म के आसपास माइग्रेन के दौरे बढ़ सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों में माइग्रेन की आवृत्ति कम भी हो सकती है, लेकिन यह हर व्यक्ति में अलग होता है।

माइग्रेन के प्रमुख लक्षण

माइग्रेन में केवल सिरदर्द ही नहीं होता। इसके साथ कई अन्य लक्षण भी हो सकते हैं।

आम लक्षण:

– सिर के एक या दोनों तरफ धड़कता हुआ दर्द
– चलने-फिरने या शारीरिक गतिविधि से दर्द बढ़ना
– मतली या उल्टी
– रोशनी से परेशानी
– तेज आवाज से परेशानी
– चक्कर या थकान
– ध्यान लगाने में परेशानी

कुछ लोगों को सिरदर्द शुरू होने से पहले ऑरा नामक लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसमें आंखों के सामने चमकती रोशनी, टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं, धुंधला दिखाई देना या शरीर के किसी हिस्से में झुनझुनी हो सकती है।

माइग्रेन क्यों होता है?

माइग्रेन का एक ही कारण नहीं होता। मस्तिष्क और नसों में होने वाले बदलाव, आनुवंशिक कारण तथा कुछ बाहरी परिस्थितियां इसके पीछे भूमिका निभा सकती हैं।

तनाव, नींद की गड़बड़ी, भूखे रहना, डिहाइड्रेशन, तेज रोशनी और हार्मोनल बदलाव जैसे कारक कुछ लोगों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं।

माइग्रेन में कौन-सी दवाएं ली जाती हैं?

माइग्रेन की दवा मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, दर्द की तीव्रता और माइग्रेन कितनी बार होता है, इस पर निर्भर करती है।

हल्के या मध्यम दर्द में डॉक्टर कुछ लोगों को पैरासिटामोल या इबुप्रोफेन जैसी दर्द निवारक दवाएं लेने की सलाह दे सकते हैं। कुछ मरीजों में डॉक्टर माइग्रेन के लिए विशेष दवाएं, जैसे ट्रिप्टान, भी लिख सकते हैं।

अगर माइग्रेन बार-बार होता है, तो डॉक्टर ऐसी रोकथाम वाली दवाएं दे सकते हैं जिन्हें नियमित रूप से लेने की जरूरत होती है।

जरूरी सावधानी

माइग्रेन की दवा अपने मन से बार-बार लेना सही नहीं है। दर्द की दवाओं का बहुत अधिक इस्तेमाल करने से दवा के अधिक इस्तेमाल से होने वाला सिरदर्द हो सकता है। इसलिए बार-बार माइग्रेन होने पर न्यूरोलॉजिस्ट या डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

माइग्रेन से राहत पाने के घरेलू उपाय

माइग्रेन के दौरान शांत और अंधेरे कमरे में आराम करने से कुछ लोगों को राहत मिल सकती है। पर्याप्त पानी पीना, समय पर भोजन करना और नियमित नींद लेना भी मददगार हो सकता है।

अपने माइग्रेन के ट्रिगर पहचानने के लिए सिरदर्द डायरी रखना उपयोगी हो सकता है। इसमें दर्द कब हुआ, कितनी देर रहा, उस दिन नींद कितनी हुई और क्या खाया-पिया था, जैसी जानकारी लिखी जा सकती है।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर सिरदर्द अचानक बहुत तेज और असामान्य तरीके से शुरू हो, सिरदर्द के साथ बेहोशी, बोलने में परेशानी, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, दौरा, तेज बुखार या गर्दन अकड़ने जैसी समस्या हो, तो इसे केवल माइग्रेन मानकर घर पर इलाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

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निष्कर्ष

माइग्रेन एक सामान्य लेकिन परेशान करने वाली न्यूरोलॉजिकल समस्या है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है और महिलाओं तथा परिवार में माइग्रेन के इतिहास वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है। सही निदान, ट्रिगर से बचाव और डॉक्टर की सलाह से उचित उपचार के जरिए माइग्रेन को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। माइग्रेन की दवा या इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें, खासकर यदि सिरदर्द बार-बार हो रहा हो, बहुत तेज हो या आपके साथ अन्य लक्षण भी हों।

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