कैंसर के मरीजों के लिए देखभाल क्यों जरूरी है?
कैंसर और उसके इलाज के दौरान शरीर पर अलग-अलग तरह के प्रभाव पड़ सकते हैं। कीमोथेरेपी, रेडिएशन, सर्जरी, इम्यूनोथेरेपी या अन्य उपचारों के कारण थकान, भूख कम लगना, मतली, उल्टी, मुंह में छाले, स्वाद में बदलाव और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इन समस्याओं का असर हर मरीज में अलग हो सकता है।
इसलिए कैंसर के मरीज को केवल बीमारी के इलाज पर ही नहीं, बल्कि खान-पान, स्वच्छता, आराम, मानसिक स्वास्थ्य और संक्रमण से बचाव पर भी ध्यान देना चाहिए।
1. डॉक्टर की सलाह और उपचार को प्राथमिकता दें
कैंसर का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में ही कराया जाना चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लें और बिना सलाह के किसी दवा को बंद या शुरू न करें।
अगर इलाज के दौरान कोई नया लक्षण या साइड इफेक्ट दिखाई देता है, तो उसे छिपाने के बजाय अपनी कैंसर केयर टीम को बताएं। उपचार के साइड इफेक्ट को नियंत्रित करने के कई तरीके उपलब्ध होते हैं।
2. खान-पान का रखें विशेष ध्यान
कैंसर के इलाज के दौरान शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और प्रोटीन की जरूरत हो सकती है। कुछ मरीजों को सामान्य से अधिक कैलोरी और प्रोटीन की आवश्यकता पड़ सकती है, खासकर जब वजन कम हो रहा हो या खाना खाने में परेशानी हो।
डॉक्टर या पंजीकृत डाइटिशियन की सलाह के अनुसार भोजन में पौष्टिक चीजों को शामिल करें।
क्या ध्यान रखें?
– पर्याप्त प्रोटीन और कैलोरी लेने की कोशिश करें।
– फल, सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें।
– भूख कम लगने पर छोटे-छोटे अंतराल में भोजन करना मददगार हो सकता है।
– पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें, यदि डॉक्टर ने पानी या तरल पदार्थ सीमित करने को न कहा हो।
– वजन लगातार कम हो रहा हो तो डॉक्टर या डाइटिशियन को बताएं।
कुछ मरीजों में दिन में कई बार थोड़ी मात्रा में खाना आसान हो सकता है।
3. भोजन की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
कैंसर के कुछ उपचारों के दौरान शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है। ऐसे समय में दूषित भोजन से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए:
– फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं।
– मांस, मछली और अंडे को अच्छी तरह पकाकर खाएं।
– बासी या खराब हो चुके भोजन से बचें।
– भोजन बनाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं।
– कच्चे और पके भोजन के लिए अलग-अलग बर्तन या कटिंग बोर्ड रखना बेहतर है।
– लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा भोजन न खाएं।
4. संक्रमण से बचने की कोशिश करें
कैंसर और उसके उपचार के दौरान कुछ मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, विशेष रूप से जब सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो।
नियमित रूप से हाथ धोएं और बीमार लोगों के संपर्क से बचने की कोशिश करें। जरूरत पड़ने पर भीड़भाड़ वाली जगहों से बचना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करना उपयोगी हो सकता है।
5. बुखार को नजरअंदाज न करें
कैंसर के इलाज के दौरान संक्रमण गंभीर हो सकता है। यदि मरीज को 38°C (100.5°F) या उससे अधिक बुखार, ठंड लगना, लगातार खांसी, गले में दर्द, दस्त, पेशाब में दर्द या अन्य संक्रमण के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अपनी चिकित्सा टीम से संपर्क करना चाहिए।
बुखार के लिए अपनी मर्जी से दवा लेने के बजाय पहले डॉक्टर या कैंसर केयर टीम से बात करें।
6. मुंह और दांतों की सफाई रखें
कुछ कैंसर उपचारों के दौरान मुंह में सूखापन, छाले, दर्द या संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए मुंह की नियमित सफाई और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ओरल केयर महत्वपूर्ण है।
अगर मुंह में लगातार छाले, सफेद परत, खून आना या खाना निगलने में परेशानी हो तो डॉक्टर को बताएं।
7. पर्याप्त आराम और नींद लें
कैंसर और उसके उपचार के दौरान थकान आम समस्या हो सकती है। दर्द, नींद की परेशानी, कम खाना, संक्रमण और उपचार के कुछ प्रभाव थकान को बढ़ा सकते हैं।
इसलिए शरीर को पर्याप्त आराम दें। हालांकि, अगर डॉक्टर ने अनुमति दी है तो हल्की शारीरिक गतिविधि भी उपयोगी हो सकती है।
8. डॉक्टर की अनुमति से हल्की एक्सरसाइज करें
हर कैंसर मरीज के लिए व्यायाम की क्षमता अलग होती है। लेकिन कई लोगों के लिए उपचार के दौरान और उसके बाद उचित शारीरिक गतिविधि सुरक्षित और लाभकारी हो सकती है। इससे ऊर्जा, जीवन की गुणवत्ता और तनाव से निपटने में मदद मिल सकती है।
व्यायाम की शुरुआत करने से पहले अपने डॉक्टर से पूछें कि आपके लिए कौन-सी गतिविधि और कितनी मात्रा उचित है।
9. बिना डॉक्टर की सलाह के हर्बल या सप्लीमेंट न लें
कैंसर मरीज अक्सर विटामिन, आयुर्वेदिक दवाओं या हर्बल सप्लीमेंट का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। लेकिन किसी भी सप्लीमेंट या वैकल्पिक उपचार को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर को इसकी जानकारी दें।
क्योंकि कुछ सप्लीमेंट या अन्य उत्पाद कैंसर के इलाज के साथ समस्या पैदा कर सकते हैं। इसलिए ‘प्राकृतिक है तो पूरी तरह सुरक्षित है’ ऐसा मानना सही नहीं है।
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10. मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें
कैंसर का पता चलने के बाद डर, चिंता, तनाव और उदासी महसूस होना संभव है। मरीज को परिवार और भरोसेमंद लोगों का भावनात्मक सहयोग मिलना महत्वपूर्ण है।
अगर लगातार चिंता, उदासी, नींद में गंभीर परेशानी या रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई हो रही है तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेने में संकोच न करें।
11. वजन तेजी से कम हो रहा हो तो डॉक्टर को बताएं
कैंसर के दौरान भूख कम लगने या उपचार के साइड इफेक्ट के कारण वजन कम हो सकता है। लंबे समय तक पर्याप्त पोषण न मिलने से कमजोरी और कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है।
अगर मरीज लगातार वजन खो रहा है, खाना नहीं खा पा रहा है या निगलने में परेशानी हो रही है तो डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें।
कैंसर मरीज को तुरंत डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
निम्न लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सा टीम से तुरंत संपर्क करें:
– 38°C या उससे अधिक बुखार
– सांस लेने में परेशानी
– लगातार उल्टी या दस्त
– बहुत ज्यादा कमजोरी या चक्कर
– असामान्य रक्तस्राव
– मुंह में गंभीर छाले या संक्रमण
– खाना या पानी निगलने में गंभीर परेशानी
– अचानक या लगातार बढ़ता दर्द
– तेजी से वजन कम होना
– संक्रमण के कोई भी लक्षण
कुछ स्थितियां आपातकालीन हो सकती हैं, इसलिए गंभीर लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
निष्कर्ष
कैंसर के मरीज की देखभाल केवल दवा और अस्पताल के उपचार तक सीमित नहीं है। पौष्टिक भोजन, सुरक्षित खाद्य पदार्थ, स्वच्छता, संक्रमण से बचाव, पर्याप्त आराम, डॉक्टर की सलाह के अनुसार शारीरिक गतिविधि और मानसिक सहयोग भी महत्वपूर्ण हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि हर कैंसर मरीज का इलाज और शरीर की जरूरत अलग होती है। इसलिए इंटरनेट पर पढ़ी किसी डाइट या घरेलू उपाय को डॉक्टर की सलाह के बिना उपचार का विकल्प नहीं बनाना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। कैंसर के मरीज को अपनी बीमारी के प्रकार, स्टेज और चल रहे उपचार के अनुसार डॉक्टर या कैंसर विशेषज्ञ की सलाह का पालन करना चाहिए। किसी भी दवा, डाइट, सप्लीमेंट या व्यायाम में बदलाव करने से पहले अपनी चिकित्सा टीम से सलाह लें।






























































































































































































