"I pay BJP minister Jaykumar Gore 3,000 rupees daily; he should join the youth in their protest," says Atul Londhe

मुंबई:पुणे में MPSC के विद्यार्थियों ने 10 दिनों तक आंदोलन कर भाजपा महायुति सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया, लेकिन सरकार के मंत्री अब इस आंदोलन पर स्तरहीन टिप्पणियां कर रहे हैं। देवेंद्र फडणवीस सरकार के मंत्री जयकुमार गोरे ने पुणे में विद्यार्थियों के आंदोलन को लेकर जो बयान दिया है, वह विद्यार्थियों का घोर अपमान है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि, “मैं मंत्री जयकुमार गोरे को रोजाना 3 हजार रुपये देता हूं, वे विद्यार्थियों के साथ आंदोलन में बैठकर दिखाएं।”

भाजपा मंत्री जयकुमार गोरे के बयान पर कड़ा प्रहार करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार विद्यार्थी विरोधी है, यह एक बार फिर उजागर हो गया है। राज्य में 70 हजार पद रिक्त हैं, लेकिन सरकार उनकी भर्ती नहीं कर रही है। MPSC परीक्षाओं का पूरा कार्यक्रम चरमरा गया है और यदि परीक्षाएं होती भी हैं, तो पेपर लीक हो जाते हैं।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग में भ्रष्टाचार का बोलबाला है, लेकिन सरकार व्यवस्था में सुधार नहीं कर पा रही है। विद्यार्थियों को अपनी मांगों के लिए 10-10 दिनों तक आंदोलन करना पड़ता है। भाजपा सरकार ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। जब विद्यार्थी अपनी जायज मांगों के लिए आंदोलन करते हैं, तो सरकार को जवाब देना ही होगा।

पुणे में राज्य के गांव-गांव से लाखों विद्यार्थी MPSC परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। मंत्री जयकुमार गोरे का बयान इन गरीब और मेहनती विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों का अपमान है। अतुल लोंढे ने मांग की कि जयकुमार गोरे विद्यार्थियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

विद्यार्थियों के आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने का दावा करके मंत्री जयकुमार गोरे ने एक नया ही तर्क पेश किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 13 वर्षों से देश में भाजपा की सरकार है, तो फिर विदेशी ताकतें पुणे तक पहुंची कैसे? क्या मोदी सरकार और फडणवीस सरकार सो रही हैं? किसी भी आंदोलन को बदनाम करना भाजपा की कार्यप्रणाली बन गई है।

किसानों के आंदोलन को खालिस्तानी बताया गया, विद्यार्थियों के आंदोलन में विदेशी ताकतों का हाथ होने का आरोप लगाया गया और जंतर-मंतर पर हुए आंदोलनों को भी विदेशी साजिश तथा देशविरोधी गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की गई। ऐसे आरोप लगाकर भाजपा खुद ही अपनी किरकिरी करा रही है। यदि देश संभालना नहीं आता, तो सत्ता की कुर्सी पर बैठे ही क्यों हैं? अतुल लोंढे ने चेतावनी देते हुए कहा कि यही विद्यार्थी भाजपा सरकार को सत्ता से हटाए बिना चुप नहीं बैठेंगे।     

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